Saturday, July 25, 2009

हमारा समाज

हम दुनिया के सबसे प्राचीन समाज के बाशिंदे है। परन्तु इसमे बुराईया बहुत है। जहाँ राम लक्ष्मण भाई हुए है। वहाँ आज एक दूसरे का खून पीने वाले भाई भी है । हमारे पवित्र रिश्ते तार तार हुए है। हम अच्छे है ये कहने मई भी डरते है। हम इंसान है इस बात को भूल हम जानवर बन चुके है। हमारी प्राचीन न्याय व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। हमारा हिन्दुस्तान बदल गया है। जहाँ शिक्षा बड़ी है वहाँ एक और हम अपनी संस्कृति भूल चुके है ।
आओ हम एक सु संस्कृत भारत का निर्माण करे । अपने भारत का नव निर्माण करे।
जय हिंद । जय भारत